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Do You Know  क्‍या आप जानते हैं?

Do You Know क्‍या आप जानते हैं?

By Sainik Suvidha | 12 Mar 2026 | 👁 384 Views

कार्यालय प्रमुख द्वारा अनंतिम पेंशन और अनंतिम उपदान (100% तक) संस्वीकृत किया जा सकेगा यदि सुसंगत नियमों के अनुसार पेंशन या उपदान या दोनों के अंतिम रूप से निर्धारण और निपटान से पूर्व सरकारी कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने की संभावना है।


लापता सरकारी कर्मचारी/पेंशनभोगी की दशा में, पुलिस प्र‍ाधिकारियों के पास प्राथमिकी दर्ज करने की तारीख से छह मास की अवधि के पश्‍चात् कुटुंब पेंशन का संदाय किया जा सकेगा।मृतक सरकारी कर्मचारी के बच्चों के साथ न्यायिक रूप से पृथक पति/पत्नी, बच्चों के अपात्र होने पर, मृत्यु/पुनर्विवाह होने तक, जो भी पहले हो, कुटुंब पेंशन प्राप्त कर सकता है।

आश्रित माता-पिता और विधवा/तलाकशुदा पुत्री/अविवाहित पुत्री को अब कुटुंब पेंशन प्रदान करने के लिए विचारार्थ कुटुंब की परिभाषा में सम्मिलित किया गया है।


नियमों में सुसंगत उपबंधो के अनुसार मरणोपरांत जन्‍मे बच्‍चे और अमान्‍य या अमान्‍यकरणीय विवाह से जन्‍मे बच्चों के लिए भी कुटुंब पेंशन अनुज्ञेय है।

सामान्य कुटुंब पेंशन अब न्यूनतम 9000/-रु. की सीमा के अधीन रहते हुए, अंतिम आहरित वेतन के 30% की एक समान दर, (1.1.2016 से प्रभावी) पर देय है।

अमान्‍य या अमान्‍यकरणीय विवाह से जन्‍मे बच्चों के अधिकारों को संरक्षित करने की आवश्यकता है, इसलिए मृत सरकारी कर्मचारी/पेंशनभोगी के इस प्रकार के विवाह से जन्‍मे बच्चों को पेंशन हितलाभ प्रदान किया जा सकेगा। अमान्‍य रूप से विवाहित पत्नी से जन्‍मे बच्चों का कुटुंब पेंशन में हिस्सा उन्हें कानूनी रूप से विवाहित पत्नी के साथ केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के नियम 54 के उप-नियम 7 (ग) के अधीन दी गई रीति से देय होगा।


कुटुंब पेंशनभोगी की मृत्यु होने की स्थिति में, कुटुंब पेंशन की बकाया राशि कुटुंब के अगले पात्र सदस्य को स्वत: देय है। पेंशन और पेंशनभोगी कल्‍याण विभाग के दिनांक 10.07.2013 के का.ज्ञा. सं.1/22/2012-पी&पीडब्‍ल्‍यू(ई) में निहित प्रावधान के अध्‍यधीन बकायों के भुगतान के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की आवश्यकता केवल ऐसे मामलों में होगी, जहां कुटुंब पेंशनभोगी की मृत्यु के पश्‍चात् परिवार का कोई सदस्य कुटुंब पेंशन प्राप्त करने के लिए पात्र नहीं है।


1.1.2006 से, केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों के उपबंधों के अनुसार न्‍यूनतम दस वर्ष की अर्हक सेवा पूरी करने के पश्‍चात् सरकारी सेवक के सेवानिवृत्त होने की दशा में, पेंशन की रकम परिलब्धियों या औसत परिलब्धियों के पचास प्रतिशत, की दर से परिकलित की जाएगी, जो भी उसके लिए अधिक लाभकारी हो।

1.1.2016 से सभी प्रकार की उपदान की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है।

सभी प्रकार के उपदान की गणना के प्रयोजनार्थ परिलब्धियों में सेवानिवृत्ति/मृत्यु की तारीख को स्वीकार्य महंगाई भत्ता शामिल किया गया है।


डीसीआरजी के विलंबित संदाय पर ब्याज देय है (भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित जीपीएफ निक्षेपों पर लागू दर पर), यदि यह सेवानिवृत्ति की तारीख से तीन महीने से अधिक विलंबित है।

                                                                                                                     Qualifying Service  


पेंशन और डीसीआरजी दोनों की गणना के प्रयोजन के लिए 3 मास और उससे अधिक की अर्हक सेवा को पूर्ण षटमासिक अवधि में पूर्णांकित किया जाएगा। इस प्रकार नौ मास की अवधि को दो अर्द्ध-वर्ष माना जाएगा।

रकारी कर्मचारी को किसी सेवा या पद से पदच्‍युत किए जाने या हटाए जाने पर उसकी विगत सेवा समपहृत हो जाएगी।

                                                                                                                         विविध

पीपीओ सरकारी सेवक की अधिवर्षिता की तारीख से न्‍यूनतम एक मास पूर्व जारी किया जाएगा और उसे उसकी अधिवर्षिता की तारीख को सौंप दिया जाएगा। पेंशनभोगी के पास पेंशन संदाय करने वाली बैंक शाखा से पीपीओ प्राप्‍त करने का भी विकल्प है।

नियत तिथि पर सेवानिवृत्ति के लिए किसी विशेष आदेश की आवश्यकता नहीं है।

दिनांक 01.07.2017 से नियत चिकित्सा भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमास कर दिया गया है।

अवकाश का नकदीकरण केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियमों के अधीन प्रदत्‍त एक हितलाभ है न कि पेंशन संबंधी हितलाभ। वर्तमान उपबंध के अनुसार, अवकाश नकदीकरण के विलंबित संदाय पर कोई ब्याज देय नहीं है।


केंद्र सरकार कर्मचारी समूह बीमा योजना (सीजीईजीआईएस) के अधीन किया गया संदाय अंतिम हितलाभ नहीं है और इसे रोका नहीं जा सकता है। आवास निर्माण के उद्देश्य से लिए गए ऋणों के कारण कर्मचारी से देय राशि के रूप में वित्तीय संस्थान द्वारा दावा की गई राशि को छोड़कर, संचय से कोई भी सरकारी बकायों की वसूली नहीं की जा सकेगी। इस योजना के अधीन विलंबित संदायों पर कोई ब्याज देय नहीं है।

नगरपालिका (पानी और बिजली शुल्क आदि) और सहकारी समितियों को देय राशि को सरकारी बकाया नहीं माना जाता है, क्योंकि नगरपालिका समितियों और सहकारी समितियों को सरकारी निकाय/संगठन नहीं माना जाता है। ऐसे बकायों की कोई वसूली डीसीआरजी से नहीं की जा सकेगी।

केवल लाइसेंस शुल्क के बकायों की वसूली महंगाई राहत से की जा सकेगी।

  1. दिनांक 01.07.2017 से सतत परिचर भत्ता 4500 रुपये से बढ़ाकर 6750 रुपये प्रतिमास कर दिया गया है।

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